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Format: Paperback
ISBN: 9788183226202
Publication Date: 02/27/2023
आमतर पर बहद सफल लग क बर म कई कहन बतई जत ह I एक ऐस कहन, जसम बदधमतत और महतवककष पर धयन दय जत ह I आउटलयरस म मलकम गलडवल तरक दत ह क सफलत क सचच कहन बहत अलग हत ह और अगर हम यह समझन चहत ह क कछ लग ह सफल कय हत ह, त हम उनक बर म ज़यद जनकर जटन चहए - जस उनक परवर, उनक जनम सथन य उनक जनम क तथ I सफलत क कहन शरआत म जतन नज़र आत ह, उसस कह ज़यद जटल और बहद रचक हत ह I आउटलयरस बतत ह क बटलस और बल गटस म कय समनत ह. गणत म एशय क लग क असधरण सफलत क कय करण ह, शरष खलड़य क जत क पछ कन-स बत छप ह, नय यरक क सभ शरष वकल क बयडट एक जस कय नह सन I यह सब पढ़, परवर, ससकत और समजक वरग क सदरभ म समझय गय ह I गलडवल कहत ह क अगर आप सलकन वल क अरबपत बनन चहत ह, त यह मयन रखत ह क आप कस सल पद हए थ I आउटलयरस (व लग जनक उपलबधय समनय स अधक हत ह) एक वचतर और अपरतयशत तरक क अनसरण करत ह, और उस तरक क सपषट करत हए गलडवल मनव कषमत क अधकतम बनन क एक रचक व वचरततजक नकश परदन कर रह ह I
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